चर्च (कलिसिया) में उपस्थिति होना क्यों महत्वपूर्ण है?



प्रश्न: चर्च (कलिसिया) में उपस्थिति होना क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर:
बाइबल हमे बताती है कि हमे चर्च (कलिसिया) में इसलिए उपस्थिति होने की आवश्यकता है जिससे कि हम अन्य विश्वासियों के साथ मिलकर परमेश्वर की अराधना कर सके और हमारी आत्मिक उाति के लिए उसके वचन को सिखाया जा सके (प्रेरितो के काम 2:42; इब्रानियों 10:25)/चर्च (कलिसिया) वह स्थान है जहाँ विश्वासी लोग एक दूसरे को प्रेम करें (इब्रानियो 3:13), एक दूसरे को भले कामों के लिए ‘‘उकसाए’’ (इब्रानिया 10:24), एक दूसरे की सेवा करे (गलातियो 5:13) एक दूसरे को चिताए (रोमियो 15:14), एक दूसरे का आदर करे (रोमियो 12:10), और एक दूसरे के प्रति दयावान और कृपालु बने (इफिसियो 4:32)।

जब कोई व्यक्ति यीशु मसीह पर उद्धार के लिए भरोसा करता है, वह जन मसीह की देह का अंग बन जाता है ( 1 कुरिन्थियों 12:27)। कलिसिया को यदि ठीक रीति से कार्य करना है, तो उसकी ‘‘देह के सभी अंगों’’ को उपस्थित होने की आवश्कता है (कुरिन्थियो 12:14-20)। ऐसे ही एक विश्वासी जन अन्य विश्वासीयों की सहायता और प्रोत्साहन के बिना अपनी सम्पूर्ण परिपक्वता को प्राप्त नहीं कर सकता है (1 कुरिन्थियों 12:21-36) । इन कारणों से, चर्च में उपस्थिति, भाग लेना, और संगति विश्वासी के जीवन का एक नित्य रहने वाला पहलु होना चाहिए । हालांकि साप्ताहिक चर्च (कलिसिया) में उपस्थिति किसी भी अर्थ से विश्वासी के लिए ‘‘जरूरी’’ नहीं है, परन्तु जो कोई मसीह का है उस में परमेश्वर की उपासना करने, उसके वचन को ग्रहण करने और अन्य विश्वासी जनों के साथ संगति करने की इच्छा होनी चाहिए ।



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