मैं अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा कैसे जान सकता हूँ?



प्रश्न: मैं अपने जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा कैसे जान सकता हूँ? परमेश्वर की इच्छा जानने के विषय में बाइबल क्या कहती है?

उत्तर:
एक स्थिति के लिए परमेश्वर की इच्छा को जानने के लिये दो महत्वपूर्ण बातें हैं (1) निश्चित करें कि जो आप माँग रहे हैं या करने का विचार कर रहें हैं वो कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे बाइबल वर्जित करती हो । (2) निश्चित करें कि जो आप माँग रहें हैं या करने का विचार कर रहें हैं वो परमेश्वर की महिमा बढ़ायेगा तथा आपका आत्मिक रूप से विकास करने में सहायता करेगा । अगर यह दो बातें सत्य है तथा फिर भी परमेश्वर आपको वो नहीं दे रहा है जो आप माँग रहें हैं-फिर संभवतया परमेश्वर की इच्छा नहीं है कि वो वस्तु आपको मिले जो आप माँग रहें हैं । या, शायद आपको थोड़ी और अधिक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता है । परमेश्वर की इच्छा को जानना कई बार कठिन है जाता है । लोग परमेश्वर से चाहते हैं कि वो उन्हें आधार रूप में बताए कि क्या करना है-कहाँ कार्य करना है, कहाँ रहना है, किससे विवाह करना है, वगैरह । (रोमियो १२:२) हमें बताता है, "और इस संसार के सदृश ना बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नए हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए जिससे कि तुम परमेश्वर को सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो ।"

परमेश्वर कदाचित ही लोगों को वैसी प्रत्यक्ष तथा निश्चित सूचना देता है । परमेश्वर हमें उन वस्तुओं के संबंध में विकल्प चुनने की अनुमति देता है । जो एक निर्णय परमेश्वर नहीं चाहता कि हम करें वो पाप करने तथा उसकी इच्छा का विरोध करने का निर्णय है । फिर, आप कैसे जानेंगें कि परमेश्वर की इच्छा आपके लिए क्या है? अगर आप प्रभु के साथ-साथ चल रहे हैं तथा सच्चे मन से अपने जीवन के लिए उसकी इच्छा जानना चाहते हैं -परमेश्वर अपनी इच्छाओं को आपके हृदय में रखेगा । महत्वपूर्ण बात परमेश्वर की इच्छा चाहना है, अपनी स्वयं की नहीं । "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा" (भजन संहिता ३७:४) । अगर बाइबल उसके विरोध में नहीं बोलती है, तथा आप को आत्मिक रूप से सच्चा लाभ पहुँचाती है-फिर बाइबल आप को निर्णय लेने तथा अपने हृदय का अनुसरण करने की "अनुमति" देती है।



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