यीशु के नाम में प्रार्थना करने के लिए क्या अर्थ है?



प्रश्न: यीशु के नाम में प्रार्थना करने के लिए क्या अर्थ है?

उत्तर:
यीशु के नाम में प्रार्थना को यूहन्ना 14:13-14 में सिखाया गया है, "जो कुछ तुम मेरे नाम से माँगोगे, वही मैं करूँगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो। यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ माँगोगे, तो में उसे करूँगा।" कुछ लोग इस वचन का गलत उपयोग यह सोचते हुए करते हैं कि प्रार्थना के अन्त में जो कुछ हमने परमेश्वर से, "यीशु के नाम से" माँगा है उसका उत्तर वह सदैव प्रदान करेगा। यह आवश्यक रूप से "यीशु के नाम से" के शब्दों को किसी एक जादूई सूत्र के रूप में व्यवहार करना है। यह पूरी तरह से बाइबल सम्मत नहीं है।

यीशु के नाम से प्रार्थना करने का अर्थ उसके दिए हुए अधिकार से प्रार्थना करना और पिता परमेश्वर से यह कहना है कि वह हमारी प्रार्थनाओं के ऊपर कार्य करे क्योंकि हम यीशु, उसके पुत्र के नाम से उसके पास आए हैं। यीशु के नाम से प्रार्थना का अर्थ उसी बात के समान है जैसे कि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना कर रहे हैं। "और हमें उसके सामने जो हियाव होता है, वह यह है कि; यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ माँगते हैं तो वह हमारी सुनता है। जब हम जानते हैं कि जो कुछ हम माँगते हैं वह हमारी सुनता है, तो यह भी जानते हैं कि जो कुछ हम ने उससे मांगा, वह पाया है" (1 यूहन्ना 5:14-15)। यीशु के नाम से प्रार्थना करना उन वस्तुओं के लिए प्रार्थना करना जो कि यीशु को महिमा और सम्मान देंगी।

प्रार्थना के अन्त में "यीशु के नाम से" प्रार्थना करना कोई जादुई फार्मूला अर्थात् सूत्र नहीं है। यदि हमें ऐसी बातें मांगे या ऐसा कहें जो कि परमेश्वर की महिमा के लिए और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार नहीं है, तो "यीशु के नाम से" मांगना अर्थहीन होगा। यीशु के नाम में वास्तव में और उसकी महिमा के लिए कहीं गई प्रार्थना ही है जो कि अति महत्वपूर्ण है, न कि प्रार्थना के अन्त में कुछ निश्चित शब्द। ये शब्द नहीं है जो कि प्रार्थना में अर्थ रखते हैं, अपितु प्रार्थना के पीछे का उद्देश्य है जो कि अर्थ रखता है। वस्तुओं के लिए प्रार्थना करना जो कि परमेश्वर की इच्छा के सहमति में हैं ही यीशु के नाम से प्रार्थना करने का सार है।



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यीशु के नाम में प्रार्थना करने के लिए क्या अर्थ है?