क्या एक पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए?



प्रश्न: क्या एक पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए?

उत्तर:
विवाह के सम्बन्ध में अधीनता बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए यहाँ पर बाइबल से स्पष्ट आदेश दिया गया है: “हे पत्नियों, अपने अपने पति के ऐसे अधीन रहो जैसे प्रभु के। क्योंकि पति पत्नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है स्वयं ही देह का उद्धारकर्ता है। पर जैसे कलीसिया मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्नियाँ भी हर बात में अपने अपने पति के अधीन रहें” (इफिसियों 5:22-26)।

पाप के इस संसार में प्रवेश करने से पहले, पति का गृहस्वामी होने का सिद्धान्त प्रचलन में था (1 तीमुथियुस 2:13)। आदम को पहले रचा गया था, और हव्वा की रचना आदम के "सहायक" के रूप में की गई थी (उत्पत्ति 2:18-20)। परमेश्वर ने अधिकारों के कई प्रकारों को इस संसार में स्थापित किया है जैसे: समाज में न्याय लागू करने और सुरक्षा का प्रबन्ध करने के लिए सरकार, परमेश्वर की भेड़ों के लिए भोजन देने और उनकी अगुवाई करने के लिए पास्टरों को दिया; अपनी अपनी पत्नियों को प्रेम और पोषण करने के लिए पतियों को दिया; बच्चों को चेतावनी देने के लिए पिताओं को दिया। प्रत्येक घटना में, नागरिकों को सरकार के प्रति, झुण्ड को चरवाहे के प्रति, पत्नियों को पति के प्रति, बच्चों को पिता के प्रति अधीनता की मांग की गई है।

युनानी शब्द हाईपोटासो का अनुवाद "अधीनता" में किया गया है, वह क्रिया का निरन्तर चलते रहने वाला रूप है। इसका अर्थ यह है कि परमेश्वर के, सरकार के, या एक पति के अधीन होना एक-समय का कार्य नहीं है। यह एक निरन्तर चलते रहने वाला व्यवहार है, जो कि व्यवहार की पद्धति बन जाता है।

प्रथम, सन्देह से परे, हम परमेश्वर के अधीन होने के लिए उत्तरदायी हैं, जो केवल एक ऐसा तरीका था जिसमें हम वास्तव में उसकी आज्ञापालन कर सकते हैं (याकूब 1:21; 4:7)। और प्रत्येक मसीही विश्वासी को नम्रता के साथ जीवन यापन करते हुए, अन्यों के प्रति अधीन होने के लिए तैयार रहना चाहिए (इफिसियों 5:21)। पारिवारिक इकाई में अधीनता के सम्बन्ध में, 1 कुरिन्थियों 11:2-3 कहता है, कि पति को मसीह के अधीन होना चाहिए (जैसे मसीह परमेश्वर के अधीन था) और पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए।

वैवाहिक जीवन में पति और पत्नी की भूमिकाओं के बारे में आज के हमारे संसार में बहुत अधिक गलतफहमीयाँ पाई जाती हैं। यहाँ तक कि जब बाइबल आधारित भूमिकाओं को सही रूप में समझ लिया जाता है, तौभी अधिकांश लोग उन्हें स्त्रियों के कल्पित “छुटकारे” के बहाने से स्वीकार करने से इन्कार करने का चुनाव करते हैं, परिणामस्वरूप परिवार नामक इकाई दो फाड़ हो जाती है। यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि संसार परमेश्वर प्रदत्त रूपरेखा का अस्वीकार कर देता है, परन्तु परमेश्वर के लोगों को इस रूपरेखा के प्रति आनन्द से भर कर हर्षित होना चाहिए।

अधीनता एक बुरा शब्द नहीं है। अधीनता हीनभावना या कम योग्यता का प्रतिबिम्ब नहीं है। मसीह ने निरन्तर स्वयं को पिता की इच्छा के प्रति अधीन (लूका 22:42; यूहन्ना 5:30), स्वयं की योग्यता के एक बिन्दु को भी एक ओर किए बिना किया।

पत्नी की उसके पति के प्रति अधीनता के सम्बन्ध में संसार की गलत सूचनाओं का सामना करने के लिए, हमें बड़ी सावधानी के साथ इफिसियों 5:22-24 में से इन बातों के ऊपर ध्यान देना चाहिए: 1) एक पत्नि को केवल एक ही पुरूष (अपने पति) के प्रति अधीन होना है न कि प्रत्येक व्यक्ति के। अधीनता का यह नियम एक स्त्री के स्थिति को समाज में बड़े पैमाने पर विस्तारित नहीं करता है। 2) प्रभु यीशु के प्रति अपनी व्यक्तिगत् आज्ञाकारिता के कारण एक पत्नी को स्वैच्छा से अपने पति के प्रति अधीन होना है। वह अपने पति के प्रति इसलिए अधीन है क्योंकि वह यीशु को प्रेम करती है । 3) पत्नी की अधीनता के लिए दिया हुआ उदाहरण मसीह की कलीसिया का है। 4) पत्नी की क्षमताओं, तोड़ों, या योग्यता के लिए कुछ भी नहीं कहा गया है; सच्चाई तो यह है कि क्योंकि वह अपने पति के प्रति अधीन होती है के यह निहितार्थ नहीं है कि वह किसी भी तरह से उससे कम योग्यता वाली या कम है। साथ ही ध्यान दें कि अधीनता के आदेश के लिए कोई परीक्षा निर्धारित नहीं की गई, केवल एक वैकल्प को छोड़कर जो “हर बात में” का है। इसलिए, इससे पहले कि कोई पत्नी उसके पति के प्रति अधीन हो, पति को किसी तरह की कोई क्षमता जाँच या समझ की जाँच की परीक्षा में उर्तीण नहीं होना है। यह एक सच्चाई हो सकती है कि वह कई तरीकों से अगुवाई करने में उसकी अपेक्षा ज्यादा योग्यवान् हो, परन्तु वह अपने पति के स्वामित्व के प्रति अधीन होते हुए प्रभु के निर्देश का अनुसरण करती है। ऐसा करते हुए, एक परमेश्वर का भय रखने वाली पत्नी “बिना किसी शब्द के कहे” अपने अविश्वासी पति को प्रभु के लिए जीत लेगी, बस केवल अपने पवित्र व्यवहार के द्वारा ही (1 पतरस 3:1)।

अधीनता के प्रेम से भरे हुए नेतृत्वपन के लिए स्वभाविक प्रतिक्रिया है। जब एक पति उसकी पत्नी को प्रेम करता है जैसे मसीह ने कलीसिया को किया (इफिसियों 5:25-33), तब अधीनता पत्नी से पति के लिए स्वभाविक प्रतिक्रिया बन जाती है। परन्तु, पति की ओर से प्रेम न किए जाने और इसकी कमी के होने के पश्चात् भी, पत्नी को “जैसे प्रभु के” प्रति अधीन होते हैं वैसे अधीन होने का आदेश दिया गया है (वचन 22)। इसका अर्थ यह हुआ कि परेश्वर के प्रति उसकी आज्ञाकारिता – अपने लिए परमेश्वर की योजना को स्वीकार करना है – जिसका परिणाम उसकी ओर से अपनी पति के अधीन होना है। “जैसे प्रभु के” वाक्य की तुलना पत्नी को यह भी स्मरण दिलाता है कि यहाँ पर एक सर्वोच्च अधिकार भी है जिसके प्रति वह उत्तरदायी है। इस कारण, पति के प्रति “अधीनता” होने के नाम पर वह परमेश्वर की व्यवस्था या वैधानिक कानूनों की आज्ञा न पालन किए जाने मजबूर नहीं है। वह उन बातों में उसके प्रति अधीन होती है जो परमेश्वर-को-सम्मान दिए जाने और व्यवस्था अनुसार और सही होती हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं है, कि वह इसलिए अधीन नहीं होत है - कि परमेश्वर-को-सम्मान दिए जाने वाली और सही बातों का दुरूपयोग करे। “अधीनता” के सिद्धान्त को दुरूपयोगता के लिए उपयोग करने का प्रयास पवित्रशास्त्र को मरोड़ना और बुराई प्रोत्साहन देना है।

इफिसियों 5 में पत्नी की अधीनता पति को स्वार्थी या अपने धौंस जमाने की अनुमति नहीं देता है। परमेश्वर का आदेश उसे प्रेम (वचन 25) करने का है, और वह परमेश्वर के प्रति इस आदेश को पूरा करने के लिए उत्तरदायी है। पति को अपने अधिकार को बुद्धिमानी, कृपालु और परमेश्वर के प्रति भय रखते हुए पूरा करना चाहिए क्योंकि वह इसके लिए जवाबदेह होना है।

जब एक पत्नी को वैसे प्रेम किया जाता है जैसे मसीह ने कलीसिया को प्रेम किया, तो अधीन होना कठिन नहीं होता है। इफिसियों 5:24 कहता है, "पर जैसे कलीसिया मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्नियाँ भी हर बात में अपने पति के अधीन रहें।" विवाह में, अधीनता पति को सम्मान और सत्कार देने का पद (देखिए इफिसियों 5:33) और जो कुछ उसमें कमी है उसे पूरा करना है। यह परमेश्वर की बुद्धिमानी से भरी हुई योजना है कि कैसे एक परिवार को कार्य करना चाहिए।

मैथ्यू हेनरी ने ऐसे लिखा है कि: "स्त्री को पुरूष की पसली से बनाया गया है। उसे सिर में से नहीं बनाया गया कि वह पुरूष पर शासन करे, न कि उसे पैरों में से बनाया गया कि उसे पुरूष के द्वारा कुचला जाए, परन्तु उसकी पसली में से उसके बराबर खड़े होने, उसके हाथों के नीचे सुरक्षित, और प्रेम किए जाने के लिए उसके हृदय की निकटता में रहने के लिए बनाई गई थी।" इफिसियों 5:19-33 में पति और पत्नी के लिए आदेशों को दिए जाने का समय की पृष्ठभूमि में आत्मा से भरे हुए होना सम्मिलित है। आत्मा से भरे-हुए-विश्वासियों को अराधना (5:19), धन्यवाद (5:20) और अधीनता (5:21) से भरे हुए होना चाहिए। पौलुस तब आत्मा-से-भरे हुए जीवन यापन के ऊपर अपने विचारों को बोलता चला जाता है और उसे वचन 22-23 में पतियों और पत्नियों के ऊपर लागू करता है। एक पत्नी को अपने पति के अधीन होना चाहिए, इसलिए नहीं क्योंकि स्त्रियाँ निम्न स्तर की हैं, परन्तु इसलिए क्योंकि इसी तरह से परमेश्वर ने वैवाहिक सम्बन्धों को कार्य करने के लिए निर्मित किया है।



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