इस पृथ्वी की आयु कितनी हैॽ इस पृथ्वी की उम्र कितनी हैॽ



प्रश्न: इस पृथ्वी की आयु कितनी हैॽ इस पृथ्वी की उम्र कितनी हैॽ

उत्तर:
बाइबल के अनुसार, यदि इस तथ्य को देखा जाए, तो आदम हमारे इस ग्रह के अस्तित्व की सृष्टि के छठे दिन रचित हुआ था, हम इस पृथ्वी की एक बाइबल-आधारित अनुमानित आयु का निर्धारण मानव जाति के कालानुक्रमिक विवरणों को देखने के द्वारा कर सकते हैं। यह मान लिया गया है कि उत्पत्ति में दिया हुआ विवरण, कि सृष्टि के छह दिन शब्दिक रूप से 24-घंटे की अवधि के थे, एक दम सही है, और यह कि उत्पत्ति के कालक्रम में किसी तरह का अस्पष्ट अन्तराल नहीं है।

जिन वंशवलियों की सूची उत्पत्ति अध्याय 5 और 11 में दी गई है वह उस युग को सूचित करती है जब आदम और उसके वंशज् के लोगों ने अपने से आगे आने वाली पीढ़ी को आदम से लेकर अब्राहम तक पूर्वजों के उत्तराधिकार के रूप में पालन पोषण किया था। परन्तु इस बात का निर्धारण करना कि अब्राहम कहाँ पर इतिहास के कालक्रम में सही रूप से आता है और उत्पत्ति 5 और 11 के युगों के साथ इसे जोड़ देने से, यह आभासित होता है कि बाइबल ऐसी शिक्षा देती है कि यह पृथ्वी थोड़ी या ज्यादा लगभग 6000 वर्ष पुरानी है।

उसके करोड़ों अरबों वर्षों होने के बारे में क्या कहना जिसे आज के आधुनिक अधिकांश विज्ञानिकों ने स्वीकार किया हुआ और हमारी शैक्षिक संस्थानों में विशाल बहुमत इसकी शिक्षा दे रहा हैॽ यह युग मौलिक रूप से तिथियों को निर्धारण करने वाली दो तकनीकों के ऊपर आधारित है: रेडियोमिट्रिक तिथि निर्धारण और भौगोलिक घटनाओं से सम्बन्धित समय निर्धारण। वे वैज्ञानिक जो इस पृथ्वी की लगभग 6000 वर्ष की आयु की वकालत करते हैं यह जोर देते हैं कि रेडियोमिट्रिक तिथि निर्धारण का सिद्धान्त दोषपूर्ण अनुमानों की श्रृंखला के ऊपर आधारित है, जबकि भौगोलिक घटनाओं से सम्बन्धित समय निर्धारण इस लिए दोषपूर्ण है क्योंकि यह वृत्तीय तर्क को उपयोग करता है। इसके अतिरिक्त, वे पृथ्वी-के पुराने होने के मिथकों के वास्तविक रूप की ओर संकेत, प्रसिद्ध गलत धारण की तरह ही करते हैं कि हीरों, कोयले, तेल, विभिन्न आकार के पत्थरों का आरोही निक्षेप और निलम्बी निक्षेप में निर्मित होना, इत्यादि के स्तरीकरण, जीवाश्मीकरण और निर्माणीकरण इत्यादि के प्रगट होने के लिए लम्बी अवधि का समय लगता है। अन्त में कम-उम्र-की पृथ्वी की वकालत करने वाले इस पृथ्वी के कम उम्र होने के लिए सकारात्मक प्रमाण को इस पृथ्वी-के-पुरानी होने के प्रमाणों के स्थान पर प्रस्तुत करते हैं जिसे वे वास्तविक रूप में मानते हैं। पृथ्वी-की-आयु को मानने वाले वैज्ञानिक यह स्वीकार करते हैं कि वे आज के समय बहुमत में कम हैं, परन्तु वे जोर देते हैं कि उनका स्तर समय के अनुसार बढ़ता और बढ़ता चला जाएगा जैसे जैसे और अधिक वैज्ञानिक प्रमाण को जाँच बार बार करते जाएगें और आज के समय के पृथ्वी-के-पुराने होने के स्वीकृत उदाहरण को निकटता से देखेंगें।

अन्त में, पृथ्वी की आयु को प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। चाहे यह 6000 वर्ष पुरानी हो या करोड़ों वर्ष ही पुरानी क्यों न हो, दोनों ही दृष्टिकोण (और इसके मध्य में सब कुछ) विश्वास और अनुमानों के ऊपर आधारित है। वे जो अरबों वर्षों पुराने होने के दृष्टिकोण में विश्वास करते हैं वे यह भरोसा करते हैं कि रेडियोमिट्रिक तिथि निर्धारण जैसा तरीका विश्वसनीय है और यह कि इतिहास में ऐसा कुछ भी घटित नहीं हुआ जिससे रोड़ियो-समस्थानिकों के सामान्य रूप से सड़ने में बाधित किया हो। वे जो पृथ्वी के 6000 वर्षों के पुराना होने में विश्वास करते हैं यह भरोसा करते हैं कि बाइबल सत्य है और अन्य तथ्य जो पृथ्वी की "आभासित" आयु का विवरण देते हैं जैसे भूगौलिक रूप से बाढ़ का आना या परमेश्वर ऐसे ब्रह्माण्ड को ऐसी स्थिति में निर्मित कर रहा है जो कि एक लम्बी अवधि का "आभास" देती है। एक उदाहरण के रूप में, परमेश्वर ने आदम और हव्वा को पूरी-तरह से विकसित वयस्क प्राणियों के रूप में रचा था। यदि एक डॉक्टर ने आदम और हव्वा को उनके सृष्टि किए हुए दिन में जाँच की होती, तो उस डॉक्टर ने उनकी आयु को अनुमानित 20 वर्ष (यो जो कुछ भी आयु आभासित होती हुई प्रगट होती) लगाया होता, जबकि सच्चाई में, आदम और हव्वा एक दिन से भी कम आयु के थे। चाहे कुछ भी क्यों न हो, विकासवाद के दृष्टिकोण के साथ नास्तिक वैज्ञानिकों की अपेक्षा परमेश्वर के वचन में भरोसा करने के लिए सदैव अच्छे कारण हैं।



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